Thursday, May 19, 2011

आस


एक दुआ मांगणक खातिर सारि रात जागूं,
पर क्वे तार अकाश बै टुट न्हैं।
बचै बे नजर ऊं न्है गोछी बगल बै,
हमार हाल चाल तक के पुछ न्हैं।
हम सांस रोकि बे देखनै रयूं, 
उ जानै रयीं और हमूल लै उकैं रोक न्हैं।
यां बै जाई बाद लै ऊ हंसते खेलते रूंछी, 
यां आइ तक पाणि आंखोंक  सुक न्हैं।
भौत पैली बै आखोंक पछ्याण छी हमेरि,
पर कभैं कैलै मनाय न्हैं कभैं क्वे रिसाय न्हैं। 
एक आस मिलणेकि दिल में बसाई छि,
आज ऊ दुनी बटिकै हिट दे फ़िर लै हमुकैं बताय न्हैं।
........मदन मोहन बिष्ट, रूद्रपुर, ऊत्तराखन्ड  

Tuesday, April 19, 2011

बारिश


 
तुमूल तो बारिश कें सिर्फ़ बरसते हुए देखौ,
पर मील बारिश कैं कुछ कहते सुणते देखौ। 


तुमूल  देखौ  बारिशक जल थल हर साल, 
मील बूदों कं पलकों पर मचलते देखो। 


कसीक मांगुल फ़िर बारिश अलबेर  सावन में 'मदन',
यों आखोंल सावन में दुनियां कं उजडते देखौ। 


सिख गोईं मि लै आब बारिशों में जीणेकि कला, 
और फिर सब्बूंल मिकैं हमेशा हंसते देखौ। 

...................................... मदन मोहन बिष्ट, रुद्रपुर, उत्तराखन्ड
 

Monday, March 14, 2011

मलाल...



वीक हंसण तो कमाल छी
पर वीक जाणक भ्हौत मलाल छी,
मुख पर हमार लगे गे ऊ दाग
हमूल समझौ ऊ गुलाल छी। 

रात भर ऊंछी वीकै स्वैण
दिन भर वीकै खयाल छी,
उडि गे नीन आब म्येरि आंखोंकि
वीक कौस ऊ सवाल छी।

करण बैठूं दिलक सौद जब लै "मदन"
जो लै मिलौ ऊ दलाल छी॥

........मदन मोहन बिष्ट, शक्ति विहार, रुद्रपुर.....

Thursday, February 3, 2011

परिचय


शिब्दाल मिकैं ब्याव आपुं घर मैं बुला,
आपण चारों च्यालां दगै म्यर परिचय करा।
यो ठुल च्यल परकाश छू,
एम ए बीएड पास छू मास्टरीक शौक छी पर बण नि पाय,
आब कस्सि.. लै नौकरीक तलाश छू।
दुसर च्यल हालै में दिल्लि बै ऎ रौ,
के कूनी ऊ.. एमबीएक डिग्री ल्यै रौ।
तिसर तौ दाडि वाव जो लागणौं देवदास,
कम्पूटरेकि क्याप्प.. डिग्री छु तैक पास।
पार ऊ जो पट्याल में भै रौ ऊ सब्बुं है नान च्यल छू,
पढाइ लिखाइ के करि न्हैं, तैक चाऊमीनौक ठ्यल छू।
मील कौ शिबदा.. तकैं घर बे निकालो,
दाज्यू.. आपण घरेकि इज्जत कें सम्भालो।
शिबदाल कौ निकाइ तो तैकं पैलिकै दिंछि ’मदन’, पर तौ भौतै काम ऊं।
बांकि तो सबै यूं बेरोजगार छन, घरक खर्च सब तै तो चलूं ॥
                                               ................................. मदन मोहन बिष्ट, रुद्रपुर

Monday, January 24, 2011

दव्न्द


- कसूर -

सच तो यो छु कि कसूर आपणै छी,
चांद पकडणकि कोशिस करी
आकाश जमीन पर मांगौ
ढुंगों पर फ़ूल खिलोण चाहीं
कानां में खुश्बूकि चाहत करी
बरफ़ में निमैल(गर्मी) चानै रयूं 
ख्वाब जो देखीं सोचौ सच है जाल 
यैक हमुकैं सजा तो मिलणै छी
सच तो यो छु कि कसूर आपणै छी।


- वादा -

नि पुछो अल्लै कि  मन्जिल कां छु  
आइ सिर्फ़ जाणक इरादा करी छू,
लफ़ाइ नि जूं कतिकै बाटां पन
हौसला लै खूब ज्यादा भरी छू,
नि हारुल कभैं यां ’मदन’ उमर भर
कैहैंणी नै आपण थैं यौ वादा करी छू।

.......................मदन मोहन बिष्ट

Thursday, December 2, 2010

बखत नि मिल

यसि दौडी जिन्दगी, कि रुकणक बखत नि मिल,
खुशी भौत मिलीं, पर हंसणक बखत नि मिल।

मील लै सजे राखीं ’दी’  घर मैं आपण,
सिलाई  जलूणक पर बखत नि मिल।

जैकें चाण मै हरै गोइं, खुद भीड मैं मि,
ऊ सामणी छी  मिलणक बखत नि मिल।

मुरझै गेइं ऊं सब फ़ूल, जो छी  इन्तजार में,
हम कानां मै उलझी रयुं और बखत नि मिल।

जीवनक दौड मै जिन्दगी बिते दे,
कभैं जिन्दगी क जीणक बखत नि मिल।

खुशी भौत मिलीं जीवन मैं,
हंसणक पर बखत नि मिल।
           ....................मदन मोहन बिष्ट

Sunday, November 28, 2010

प्यार झन करिया

  
 प्यार झन करिया
  कैहाल छी मील पैलीकै,  म्यर खयाल झन करिया,
  लोग बाग जे लै कौल, तुम सवाल झन करिया।
  हैगो म्यार दगाड पैली लै, योस कत्तू बखत,
  यो बार तुम लै, के बबाल झन करिया ॥
  न्है जाया आपण बाट इकलै चाहे तुम,
  हिटन बाट बैठ बे, म्यार इन्तजार झन करिया।
  बगि गोइं गध्यारों मैं, आंसुवोंक पैली लै, भौत बार,
  तुम लै इस्तेमाल, यो हथियार झन करिया ॥
  दबै बे सिरानिक ताव मेरि फोटो, मेरि नीन हराम झन करिया,
  प्यास मर गे बिल्कुल मेरि आब, पेश मिकै तुम जाम झन करिया।
  आपण ऎब छुपूणक खातिर,  किस्स म्यार आम झन करिया,
  नाम उसी लै है सकूं दुनि मैं तुमर , खाल्लि मिकैं बदनाम झन करिया ॥
  कर लिया कतुक लै चोट दिल पे हमार, हमुकैं मन्जूर छू ’मदन’
  प्यार आब बिछीन हैगो हमुकैं, हमार दगड प्यार झन करिया॥
........मदन मोहन बिष्ट........