Monday, January 24, 2011

दव्न्द


- कसूर -

सच तो यो छु कि कसूर आपणै छी,
चांद पकडणकि कोशिस करी
आकाश जमीन पर मांगौ
ढुंगों पर फ़ूल खिलोण चाहीं
कानां में खुश्बूकि चाहत करी
बरफ़ में निमैल(गर्मी) चानै रयूं 
ख्वाब जो देखीं सोचौ सच है जाल 
यैक हमुकैं सजा तो मिलणै छी
सच तो यो छु कि कसूर आपणै छी।


- वादा -

नि पुछो अल्लै कि  मन्जिल कां छु  
आइ सिर्फ़ जाणक इरादा करी छू,
लफ़ाइ नि जूं कतिकै बाटां पन
हौसला लै खूब ज्यादा भरी छू,
नि हारुल कभैं यां ’मदन’ उमर भर
कैहैंणी नै आपण थैं यौ वादा करी छू।

.......................मदन मोहन बिष्ट

Thursday, December 2, 2010

बखत नि मिल

यसि दौडी जिन्दगी, कि रुकणक बखत नि मिल,
खुशी भौत मिलीं, पर हंसणक बखत नि मिल।

मील लै सजे राखीं ’दी’  घर मैं आपण,
सिलाई  जलूणक पर बखत नि मिल।

जैकें चाण मै हरै गोइं, खुद भीड मैं मि,
ऊ सामणी छी  मिलणक बखत नि मिल।

मुरझै गेइं ऊं सब फ़ूल, जो छी  इन्तजार में,
हम कानां मै उलझी रयुं और बखत नि मिल।

जीवनक दौड मै जिन्दगी बिते दे,
कभैं जिन्दगी क जीणक बखत नि मिल।

खुशी भौत मिलीं जीवन मैं,
हंसणक पर बखत नि मिल।
           ....................मदन मोहन बिष्ट

Sunday, November 28, 2010

प्यार झन करिया

  
 प्यार झन करिया
  कैहाल छी मील पैलीकै,  म्यर खयाल झन करिया,
  लोग बाग जे लै कौल, तुम सवाल झन करिया।
  हैगो म्यार दगाड पैली लै, योस कत्तू बखत,
  यो बार तुम लै, के बबाल झन करिया ॥
  न्है जाया आपण बाट इकलै चाहे तुम,
  हिटन बाट बैठ बे, म्यार इन्तजार झन करिया।
  बगि गोइं गध्यारों मैं, आंसुवोंक पैली लै, भौत बार,
  तुम लै इस्तेमाल, यो हथियार झन करिया ॥
  दबै बे सिरानिक ताव मेरि फोटो, मेरि नीन हराम झन करिया,
  प्यास मर गे बिल्कुल मेरि आब, पेश मिकै तुम जाम झन करिया।
  आपण ऎब छुपूणक खातिर,  किस्स म्यार आम झन करिया,
  नाम उसी लै है सकूं दुनि मैं तुमर , खाल्लि मिकैं बदनाम झन करिया ॥
  कर लिया कतुक लै चोट दिल पे हमार, हमुकैं मन्जूर छू ’मदन’
  प्यार आब बिछीन हैगो हमुकैं, हमार दगड प्यार झन करिया॥
........मदन मोहन बिष्ट........

Saturday, November 27, 2010

जिन्दगी जी हाली

लोग सात जनम साथ निभोणक बात करनी,
मील तो थ्वाड देर मै ही जिन्दगी  जी हाली।
त्यर यादों कैं भुलै बेर खुदै सम्भल गोइं मी,
पर तील मिलते ही किलै आंख  झुकै हाली।
घरोंदा बडूंण में सदियो बै लागि छन लोग
जो उजड जां मिनटों में,
तील तो मिनटों मैं फ़िर दुनियां सजै हाली।
म्यर स्वैणों मै सिर्फ़ और सिर्फ़ तू ऊंछी,
हमूल आब नीन लै आपणि दुश्मन बणै हाली।
लोग सात जनम साथ निभोणक बात करनी,
मील तो थ्वाड देर मै ही जिन्दगी  जी हाली।
......................मदन मोहन बिष्ट

Thursday, November 25, 2010

समय

कभैं सुखल गुजरौ कभैं दुखल गुजरौ,
जौस लै गुजरौ समय भौल गुजरौ।

पोरुं तक  बचपन छी, बेइ तक जवानी,
लागण नि रोय यू आखां में इतु समय गुजरौ॥

बहुत कोशिश करी, करूं मुट्ठी में पर कतु  पकड़ पांई,
म्यर सामणी बै यूँ समय गुजरौ।

झपकौंण पलकों कैं और सितण आँखोंक जरूरी छी,
हमेशा खुली आँखांल कैक समय गुजरौ॥

ऊं डाव बोठों पर ऎ गैई आई नयी पात,
जनर पतझड मै बहौत बुर बखत गुजरौ !

आज उमर बितणक बाद योस लागणों,
जाणि कास कास कामौं मैं हमर समय गुजरौ॥
......................मदन मोहन बिष्ट

भौत देर तक....

साथ नि्भै नि पाइ ऊ भोत देर तक,
पर मिकैं भुल नि पाल ऊ भोत देर तक।
जब लै बैठोल पास वीक  क्वे,
म्यरै किस्स सुणाल उकैं भौत देर तक।
मि लै हर एक मै मुखड देखुल वीक,
ऊन जानै ऊ लै मिकैं चाल भौत देर तक।
कौस हाल मै छिन वां बै जाई बाद मि,
सुण बे यकीन नि आल उकैं भौत देर तक।
..............................मदन मोहन बिष्ट

Thursday, October 21, 2010

एहसास

By Madan Mohan Bisht 
फ़ोटो चिट्ठी फ़ाड देईं खुद, हमार जैल सब रात्ती पै,
ब्याव हूण पर उठै ल्येगै फ़िर, चिथाड-मिथाड जाणि कत्ति बै।

झन आइया तुम नजर हमूंकैं, गुस्सम य़ां तक कै दे वील,
नि देख्यूं जो चार दिन तो लगंण चार कर हालीं वील।

कभैं फ़िर ना बात करुल आब, कसम उनूल यो खाई छी,
साथ नि छोडुल कभैं तुमर, आब यसि सौगन्ध उठाई छू।